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Bhagavad Gita 12 July 2024 Shlok 4.33

 जो कुछ भी शुरू हुआ है वो आत्मा से ही हुआ है।  अहम् भी आत्मा से आया है।   जीना तो सगुन के साथ ही है बस उसके साथ अटैच मत हो जाना।   निर्गुण का आशीर्वाद रहता है तो सगुण जीवन जीने की  तमीज आ जाती है।  वेदांत द्रव्य से हटाकर  मुक्ति पर लाता  है।  कोई व्यक्तिगत मुक्ति नहीं होती।  कोई चीज आकर्षित करे उतना आत्मा अवलोकन बढ़ाये।